श्रावण सोमवार के दिन आज गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी के श्री मुख से पवित्र श्री शिवमहापुराण कथा के छटे दिन आज सुन्दर कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. कथा में आज अंधकासुर का प्रसंग प्रमुख रहा.
केवल एक मनुष्य ही वह जीव हैं जिसमें बुद्धि हैं, एवं उसे उसके द्वारा किये गए कर्मों का भान रहता हैं. अब यह मनुष्य पर निर्भर करता हैं, कि वह अपनी बुद्धि द्वारा अच्छे कर्म कर रहा हैं, या वह बुरे कर्मों से घिरा रहता हैं.
आचार्य विद्यासागर जी महाराज कहते हैं, जीवन में आप जितने भी लोग मिले उनमें आपको केवल अच्छे गुण ही देखना चाहिए. जब हम भोजन करने बैठते हैं तो थाली जो अच्छा होता हैं, उसे ही सबसे पहले ग्रहण करते हैं. जब किसी स्थान पर बैठते हैं तो हम वहां भी कोई अच्छी जगह ही देखकर बैठते हैं. इसी तरह प्रतिदिन हमें कई लोग मिलते हैं, हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति में हम कुछ न कुछ अच्छा देखें एवं अच्छा ग्रहण करते रहे, जब थोडा थोडा भी अच्छा ग्रहण करते रहे तो हमारे साथ भी अच्छा होना प्रारम्भ होने लगता हैं.
झोपडी में रहकर भी कोई शिव का भजन कर रहा होता हैं, तो कहीं कोई महल में रहकर भी शिव का भजन कर रहा होता हैं.
एक नाम के बहुत सारे लोग हो सकते हैं. परन्तु शिव के सन्मुख आपका नाम नहीं चलता, आपका परिचय नहीं चलता, यह कोई मायने नहीं रखता कि आप झोपडी में शिव भजन कर रहे हैं या महल में रहकर शिव भजन कर रहे हैं. शिव के सन्मुख तो केवल आपके के ह्रदय का प्रेम मायने रखता हैं. आप कितने प्रेम से शिव भजते हैं, आप कितने मन से शिव की पूजा करते हैं बस यही मायने रखता हैं.
चंचुला देवी ने तुमरुका जी से निवेदन किया, मेरे पति ने कभी कोई नेक कर्म नहीं किया, ना कोई पुण्य का कार्य किया, कभी कोई भजन नहीं किया फिर मेरे पति को मोक्ष कैसे मिल जाएगा. तुमरुका जी कहते हैं है – यह शिवमहापुराण कथा केवल एक कथा नहीं है, यह स्वयं शिव की वाणी हैं. यह महादेव के शब्द हैं. ये शब्द जब हमारे भीतर प्रवेश करते हैं, तो भीतर जाकर यह हमारे किये गए सभी पापों को नष्ट कर पुण्य का जीवन प्रारम्भ करती हैं.
लिंगपुराण के अंतर्गत एक बड़ी सुन्दर बात आई, किसी ने गलत कार्य कर्म कर लिया, गलत सोच आ गई, गलत भाव प्रकट हो गया, उसके बाद भी शिवजी पर अर्पित किया गया जल उसको फल प्रदान करता हैं.
आज के समय में आप को बाजार से कुछ भी सामन उधार मिल सकता हैं, आप कार, मोबाइल, सब्जी, टीवी आदि कुछ भी उधार ला सकते हैं परन्तु केवल और केवल पुण्य हैं जो आपको उधार नहीं मिलता हैं, आपका पुण्य आपको ही कमाना पड़ता हैं.
जीवन मिलता हैं तो सुख और दुःख भी साथ में मिलते ही हैं. परन्तु ऐसा कोई दुःख ऐसा कोई कष्ट नहीं जिसको काटने का उपाय महादेव के पास नहीं. शिवमहापुराण में आपके हर दुःख आपके हर कष्ट का समाधान आपको प्राप्त होता हैं. बस आवश्यकता अपने शिव पर किये गए विश्वास की हैं.
रामचरित मानस व्यक्ति को जीवन जीना सिखाती हैं. श्रीमद भागवत आपको सिखाती हैं कि आपकी मृत्यु कैसी होनी चाहिए. एक शिवमहापुराण कथा है जिसमें जीवन के दुःख दर्द तकलीफे दूर करने के सभी उपाय प्राप्त होते हैं. हमें प्राप्त होता हैं शिव पर बेलपत्र कैसे अर्पित करते हैं, काली मिर्च, काली तिल कैसे चढाते हैं, आदि जानकारी हमें शिवमहापुराण, लिंग पुराण आदि पुराणों में प्राप्त होती हैं
जब किसी डॉक्टर के पास जाए तो डॉक्टर से एकबात पूछियेगा क्या खाने से बीमारी होती हैं. वह डॉक्टर आपको बताएगा, नहीं खाने से कोई बीमारी नहीं बल्कि भोजन के न पचने से बीमारी होती हैं. हम भक्ति तो करते हैं, हम भजन तो करते हैं, हम शिव का पूजन भी करते हैं, परन्तु हम शिव में दिल नहीं लगाते हैं, इसलिए शिव हमें प्राप्त नहीं होता हैं. यदि आप शिव कथा में भी जाते हैं तो केवल भीड़ बढ़ाने के लिए शिवमहापुराण कथा में न जाए, शिव कथा में जाए तो अपना दिल लगाने के लिए, अपना मन शिव में लगाने के लिए जाना चाहिए.
यदि आपके पास धन,वैभव कुछ नहीं हैं, आप स्वयं कोई भंडारा, कथा आदि नहीं कर पा रहे हैं तो भी कोई चिंता की बात नहीं, यदि कोई इस तरह का आयोजन हो रहा हो तो आप वहां जाकर कोई सहयोग मात्र भी कर देते है तो भी आपको पुण्य प्राप्त होता हैं.
यदि कोई बीमारी आई हैं, कोई रोग आया हैं तो आपको सबसे पहले किसी डॉक्टर के आस जाना चाहिए. वे जब कोई दवाई दे तो उस दवाई को पुरे विश्वास से कुंदकेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए ग्रहण करना चाहिए. आपको अवश्य लाभ प्राप्त होता हैं.
जब भी किसी स्त्री का आप दर्शन करें तो उसे एक माता के रूप में देखना चाहिए. माता के रूप में जो दर्शन होता हैं वह वात्सल्य का दर्शन होता हैं, करुणा का दर्शन होता हैं.
गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा आज कथा के माध्यम से कई सुन्दर उपाय भी बताए गए हैं जिसमें सोमवारी अष्टमी उपाय, श्री श्रम्भेश्वर महादेव उपाय आदि है. आप यह सभी उपाय गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा ऐप के उपाय खंड में देख सकते हैं. साथ ही इन उपायों के वीडियो भी आप ऐप के महत्वपूर्ण खंड या Youtube चैनल ‘Gurudev App’ पर देख सकते हैं.
इसके साथ ही आज श्री शिवमहापुराण कथा का छटा दिवस समाप्त हो रहा हैं.
हर हर महादेव
श्री शिवाय नमस्तुभ्यम 🙏🙏🙏
प्रतिदिन हम लगभग 21600 श्वास लेते है. वह प्रत्येक श्वास एक शिव का रूप है. जब तक वह श्वास आती है हम जीवित होते है अन्यथा शरीर एक लाश हो जाता है. इसी...
आज से हैदराबाद में गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी की श्री शिव महापुराण कथा प्रारम्भ हो रही है. आज कथा के प्रथम दिन गुरुदेव द्वारा अजामिल, बिंदुक-चं...
गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा भिलाई, छत्तीसगढ़ में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा के अंतिम दिवस आज कथा का वाचन किया गया हैं. उक्त कथा का संक्षे...
जब भी प्रेम का नाम आता हैं, तो सबसे पहले शिव का नाम आता हैं. शिव प्रेम देते भी हैं और शिव अपने भक्तों का प्रेम प्राप्त भी करते हैं. आज के दिन को म...
सम्पूर्ण माह में केवल श्रावण माह एक ऐसा माह हैं, जिसमें मनुष्य हो, सर्प हो, किन्नर हो, गन्धर्व हो या कोई भी जीव हो, यदि वे शिव मंदिर के सामने से भी...
एक मन और दूसरा मंदिर यह दोनों जितने निर्मल और साफ़ होंगे उतना ही भगवान महादेव की कृपा हम सब पर होती हैं. मन भी निर्मल और साफ़ होना चाहिए, यदि मंदिर ...
श्रावण महीने में जितना जितना शिव नाम लिया जाता हैं, जितना शिव भक्ति में इस मन को लगाया जाता है, उतना ही जीवन में आनंद की अनुभूति होने लगती हैं. जम...
स्कंध पुराण में, विष्णु पुराण में पांच ऐसे वृक्ष बताए हैं जिनके निचे से केवल आप निकलकर भी चले जाए तो आपको अद्भुत बल प्राप्त होता हैं. जब आप कुर्म ...
शिव-भक्ति का मुख्य आधार विश्वास हैं. यदि आप शिव पर विश्वास करते हैं तो ही शिव आपको प्राप्त होता हैं. आपके द्वारा किये गए विश्वास के कारण ही शिव आप...
गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी बताते हैं कि चातुर्मास के चार माह कोई व्रत, दान, पूजन, यज्ञ, तीर्थ यात्रा नहीं कर पाए तो भी कोई बात नहीं. उमा खंड के...