यदि डॉक्टर ने कहा शरीर में कोई रोग है और वह रोग जाने वाला नहीं है इस रोग का कोई समाधान नहीं है. तब
प्रदोष काल में (शाम के समय) एक बेलपत्र, एक दूर्वा, एक चावल का दाना ( केवल एक अक्षत)
सोमेश्वर भगवान के नाम का उच्चारण करते हुए भोलेनाथ को समर्पित करना है
समर्पित करने का तरीका:
बेलपत्र प्रयास करें छोटा ही हो. अब इस बेलपत्र को जलाधारी जहा से जल निचे की ओ गिरता है, वहा खड़ा चिपकाना है(बड़ी पत्ती ऊपर की ओर, डंडी निचे की ओर), इसी पर दूर्वा समर्पित करें दूर्वा का मुंह ऊपर की ओर रखें. एवं चावल का दाना समर्पित कर देवे.
सोमेश्वर भगवान का स्मरण करें, श्री शिवाय नमस्तुभ्यम मंत्र का जाप करें एवं अपने रोग जो भी बीमारी हो उसका स्मरण करते हुए उसे दूर करने की प्रार्थना करें.
अब इसमें से बेलपत्र एवं दूर्वा एक अलग पात्र में रख लेवें. एवं अब एक लौटा जल भोलेनाथ को अर्पित करें एवं बाबा से प्रार्थना करते हुए वह एक बिल्वपत्र और एक दूर्वा अपने घर ले आए.
दूर्वा उसी रात (शरद पूर्णिमा की रात्री) को अच्छे से चबा चबा कर ग्रहण कर लेवें. एवं बिल्वपत्र को दुसरे दिन सुबह के समय स्नान करने के पश्चात भोजन करने से पहले ग्रहण कर लेवें.
आपका कैसा भी रोग हो भोलेनाथ रोग को दूर कर आराम प्रदान करेंगे.
श्री शिवाय नमस्तुभ्यम
नोट: यह उपाय केवल शरद पूर्णिमा के लिए है
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